MIT के एक पीएच.डी. छात्र और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ क्रिप्टोग्राफरों ने एक-दूसरे से अनजान रहते हुए क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की छह साल पुरानी खुली समस्या हल की — यह साबित करना कि कारगर 'अन-क्लोनेबल एन्क्रिप्शन' संभव है — और उनके पेपर सिर्फ 3 घंटे 18 मिनट के अंतर पर जमा हुए। दोनों टीमों ने प्रमाण के मूल विचारों का श्रेय OpenAI के GPT-5.6 Sol Ultra को दिया, पर तरीके बिल्कुल अलग थे: छात्र ने घंटों मॉडल को हाथ से दिशा दी, जबकि प्रोफेसरों ने उसे अपने बनाए 'आलोचना-और-सुधार' सिस्टम से चलाया। दोनों पेपर अभी पीयर-रिव्यू से नहीं गुज़रे हैं।